Talaash Kar Na Saka Phir Mujhe Wahan Jaakar By Akhtar Ansari

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Talaash Kar Na Saka Phir Mujhe Wahan Jaakar By Akhtar Ansari

A famous Hindi Shayari By Akhtar Ansari, Talaash Kar Na Saka Phir Mujhe Wahan Jaakar…

तलाश कर न सका फिर
मुझे वहाँ जाकर
ग़लत समझ के जहाँ
उसने खो दिया था मुझे

Complete Ghazal

वो इत्तफ़ाक़ से रस्ते में मिल गया था मुझे
मैं देखता था उसे और वो देखता था मुझे

अगरचे उसकी नज़र में थी न आशनाई
मैं जानता हूँ कि बरसों से जानता था मुझे

तलाश कर न सका फिर मुझे वहाँ जाकर
ग़लत समझ के जहाँ उसने खो दिया था मुझे

बिखर चुका था अगर मैं, तो क्यों समेटा था
मैं पैरहन था शिकस्ता तो क्यों सिया था मुझे

है मेरा हर्फ़-ए-तमन्ना, तेरी नज़र का क़ुसूर
तेरी नज़र ने ही ये हौसला दिया था मुझे

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