शौक तो नहीं अपने सारे लफ्ज़ सरे आम लिखने का…

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Shauk to nahi yun apne lafz sare aam likhne ka

जब आपका अपना कोई बहुत दूर चला जाता है, और उससे बात – मुलाकात कुछ भी नहीं हो पाती और फिर भी हमें उससे कुछ कहना और सुनना होता है तब हमारे पास pen & paper का ही सहारा होता है। जो कुछ हम उस शक़्स से बोलना चाहते हैं कुछ पूछना चाहते तो वो लफ्ज़ हम लिख लेते हैं इस आस में कि कहीं न कहीं कभी तो मुलाकात होगी और तब वो शक़्स के सामने वो सब अपने जज़्बात रख दूंगा।

 

Shauk to nahi yun apne lafz sare aam likhne ka,

Kya karu, koi sur raasta hee nahi tujhse baat karne ka!!

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